
कलेक्टर श्री चंद्रवाल ने किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियां अपनाने और शासन की योजनाओं का लाभ उठाने किया प्रेरित
राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़ // खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र साल्हेवारा में कृषि विभाग एवं संबंधित विभागों के संयुक्त तत्वावधान में जैविक किसान मेला एवं कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के 600 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर जैविक एवं प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और शासन की किसान कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के लिए प्रोत्साहित करना रहा। कार्यशाला में जैविक खेती, तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि के विभिन्न उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, पूर्व विधायक कोमल जंघेल, जिला पंचायत सभापति हेमलता मांडवी, सांसद प्रतिनिधि खम्मन ताम्रकार सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, उप संचालक कृषि राजकुमार सोलंकी, प्रदीप भोले, सहायक मत्स्य पालन अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए।
कलेक्टर ने किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती अपनाने किया प्रेरित
कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने किसानों को संबोधित करते हुए कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों एवं वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए किसानों को परंपरागत कृषि पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीकों का समन्वय करना चाहिए। उन्होंने किसानों को शासन द्वारा संचालित कृषि एवं किसान कल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा कृषि विभाग के अधिकारियों से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
कलेक्टर श्री चंद्रवाल ने मृदा एवं जल संरक्षण, फसल विविधीकरण तथा उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संसाधनों का संरक्षण करने और खेती की लागत कम करने वाली तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कृषि प्रदर्शनी एवं विभागीय स्टॉलों से किसानों को मिली उपयोगी जानकारी
किसान मेले में कृषि प्रदर्शनी के साथ विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन स्टॉलों के माध्यम से किसानों को उन्नत बीजों, जैविक खाद निर्माण, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, फसल विविधीकरण तथा तिलहन फसलों की वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि उचित फसल प्रबंधन, संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती की लागत कम करने के साथ उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
कार्यशाला में किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों का चयन करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा जैविक संसाधनों के प्रभावी उपयोग के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में संचालित योजनाओं, गतिविधियों एवं किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी साझा की।
प्रगतिशील किसान बिसेशर साहू ने साझा किए जैविक खेती के अनुभव
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसान बिसेशर साहू ने जैविक खेती से जुड़े अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा किए। उन्होंने जैविक पद्धतियों के माध्यम से खेती करने, फसल उत्पादन बढ़ाने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी। उनके अनुभवों से किसानों को जैविक खेती की उपयोगिता और इसे अपनाने की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला।
जैविक कीटनाशक बनाने का जीवंत प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र
किसान मेले में बीआरसी ललिता यादव द्वारा जैविक कीटनाशक तैयार करने की विधि का जीवंत प्रदर्शन किया गया। उन्होंने किसानों को जैविक कीटनाशकों के निर्माण की प्रक्रिया तथा फसलों में उनके उपयोग के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को जैविक तरीके से फसल सुरक्षा एवं कीट प्रबंधन के उपायों से अवगत कराया गया। इस गतिविधि में किसानों ने विशेष रुचि दिखाई और जैविक खेती की तकनीकों को समझा।
कार्यक्रम के माध्यम से वनांचल क्षेत्र के किसानों को कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। किसान मेले एवं कृषि कार्यशाला ने किसानों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, कृषि उत्पादन में सुधार लाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।



