
राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़, 21 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) के अंतर्गत संचालित “मोर गांव-मोर पानी” महाअभियान खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। जिले की 221 ग्राम पंचायतों में जनभागीदारी के साथ व्यापक स्तर पर जल संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं, जिससे वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण एवं ग्रामीण जल सुरक्षा को नई मजबूती मिली है।
जिला प्रशासन द्वारा VB-G RAM G, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) तथा विभिन्न अभिसरण योजनाओं के माध्यम से अब तक 1,952 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनके अंतर्गत 61,935 कंटूर ट्रेंच सहित कुल 63,783 से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण एवं विकास किया गया है। इन संरचनाओं से 17.97 लाख घनमीटर से अधिक जल संचयन क्षमता विकसित हुई है तथा 31.63 लाख मानव दिवस का सृजन हुआ है। इससे जिले के 48,299 ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्थायी परिसंपत्तियों का लाभ प्राप्त हुआ है।
तालाब, डबरी और रिचार्ज संरचनाओं से बढ़ रही जल सुरक्षा
अभियान के तहत 704 तालाबों का जीर्णोद्धार, 95 नए सामुदायिक तालाबों का निर्माण, 411 आजीविका डबरी, 215 व्यक्तिगत सिंचाई कुएं, 81 बोर रिचार्ज संरचनाएं, 64 नाला उपचार कार्य, 30 गैबियन चेकडैम, 17 सतही कंटूर ट्रेंच (एससीटी) तथा 61,935 कंटूर ट्रेंच सहित विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही सोख्ता गड्ढों, सामुदायिक एवं निजी रिचार्ज पिट तथा अन्य वर्षा जल संचयन संरचनाओं को भी बढ़ावा दिया गया है। इन प्रयासों से भू-जल स्तर में सुधार, कृषि एवं पेयजल उपलब्धता तथा जल संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण को आधार मिला है।
“नवा तरिया आय का जरिया” अभियान के माध्यम से नए तालाबों के निर्माण एवं पुराने जलस्रोतों के पुनर्जीवन को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं आजीविका डबरी और व्यक्तिगत सिंचाई कुओं के माध्यम से किसानों को सिंचाई के स्थायी साधन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
जनभागीदारी से जल संरक्षण बना जनआंदोलन
अभियान के अंतर्गत शासकीय भवनों में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ग्रामीण क्षेत्रों में निजी वर्षा जल संचयन संरचनाएं, सोख्ता गड्ढे एवं बोर रिचार्ज कार्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी स्वप्रेरणा से अपने घरों और खेतों में जल संरक्षण संरचनाएं विकसित कर अभियान से जुड़ रहे हैं।
कलेक्टर इन्द्रजीत सिंह चन्द्रवाल के मार्गदर्शन में सभी कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में वर्षा जल की हर बूंद को संरक्षित करने की दिशा में गुणवत्ता के साथ कार्य किए जाएं। लगातार हो रही वर्षा से जिले में निर्मित तालाबों, डबरियों, कंटूर ट्रेंचों एवं चेकडैमों में जल भराव प्रारंभ हो गया है, जिससे भू-जल पुनर्भरण, सिंचाई सुविधा और पेयजल उपलब्धता में दीर्घकालिक सुधार की उम्मीद है। “मोर गांव-मोर पानी” महाअभियान जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए जल सुरक्षित, हरित और समृद्ध ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



