
राज नेशनल न्यूज़ विश्वराज ताम्रकार खैरागढ़ : ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में संचालित आईएफसी (इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर) परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं। ग्राम कोहकाबोड़ की नर्सरी उद्यमी नीलू वर्मा ने अपनी मेहनत, प्रशिक्षण और नवाचार के बल पर एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान बनाई है। गुरुवार को कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल ने ग्राम कोहकाबोड़ पहुंचकर उनकी नर्सरी का निरीक्षण किया तथा गतिविधियों की जानकारी ली।
आईएफसी क्लस्टर के अंतर्गत मोहडबरी, कोहकाबोड़, डोकराभाठा और कॉचरी ग्राम शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने नीलू वर्मा द्वारा किए जा रहे पौध उत्पादन, विपणन और आय सृजन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित ऐसे नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने नर्सरी गतिविधियों के विस्तार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया।
नीलू वर्मा ने बताया कि वर्ष 2025 में आईएफसी परियोजना से जुड़कर नर्सरी उद्यमी के रूप में कार्य प्रारंभ किया। शुरुआती चरण में उन्होंने नामधारी-965 किस्म के 30 हजार टमाटर पौधे तैयार किए और 6 महिला किसानों को 19,332 पौधों का विक्रय किया। इससे उन्हें व्यय निकालने के बाद 5,790 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जिसने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।
अपनी क्षमता को और विकसित करने के लिए नीलू वर्मा ने खरीफ 2026 में शासकीय उद्यान नर्सरी पेंड्री, राजनांदगांव में पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए नर्सरी का विस्तार किया। उद्यानिकी विभाग की ओर से 1.70 लाख रुपये की अनुदान सहायता से 374 वर्गमीटर क्षेत्र में रोड नेट संरचना विकसित की गई, जिससे गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन संभव हो सका।
वर्तमान में नीलू वर्मा की नर्सरी में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी और करेला सहित कुल 2 लाख 45 हजार 757 पौधे तैयार किए गए हैं। इनमें से 96 हजार 425 पौधों का विक्रय 30 महिला किसानों को किया जा चुका है, जिससे उन्हें 1 लाख 18 हजार 890 रुपये की आय प्राप्त हुई है। नर्सरी संचालन पर 61 हजार 750 रुपये व्यय करने के बाद उन्होंने 10 हजार रुपये की लागत से फॉगर सिस्टम स्थापित किया है, जिससे अधिक तापमान के दौरान पौधों की सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल रही है।
नीलू वर्मा ने बताया कि किसानों की बढ़ती मांग को देखते हुए वे भविष्य में रैक सिस्टम आधारित पौध उत्पादन की दिशा में कार्य करना चाहती हैं, ताकि सीमित क्षेत्र में अधिक संख्या में पौधे तैयार किए जा सकें। 15 मई से 16 जुलाई 2026 के बीच पौध विक्रय से उन्हें लगभग 57 हजार 950 रुपये की आय प्राप्त हुई है।
नीलू वर्मा की सफलता यह दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल स्वरोजगार स्थापित कर सकती हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं। आईएफसी परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता, आय संवर्धन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है।



