
रिपोर्टिंग – पत्रकार संगीत कुमार चौबे
राज नेशनल न्यूज़ साजा : प्राचीन काल से ही ग्राम देऊरगांव स्थित मां महामाया देवी मंदिर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केंद्र रहा है। मान्यता है कि माता के दरबार में श्रद्धा से मांगी गई मनोकामना समय आने पर पूरी होती है। इसी आस्था से जुड़कर देऊरगांव के अनिकेत चौबे ने अपनी पहली सैलरी से मां महामाया देवी को रजत मुकुट भेंट करने का संकल्प लिया था, जिसे उन्होंने पूरा किया।
देऊरगांव निवासी अजीत चौबे ने तहसीलदार के पद पर रहते हुए क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी पत्नी अनीता चौबे ने भी परिवार और बच्चों के संस्कार एवं शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके पुत्र अनिकेत चौबे शुरू से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने कक्षा दसवीं में टॉप किया। इसके बाद गेट प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 99 हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
अनिकेत ने आईआईटी दिल्ली से एमटेक की शिक्षा पूरी की। वर्तमान में वे बेंगलुरु की एक प्रतिष्ठित कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हैं। उनकी मां अनीता चौबे ने बताया कि अनिकेत बचपन से ही अपने लक्ष्य को लेकर सजग रहे हैं। उन्होंने पढ़ाई और करियर को प्राथमिकता देते हुए लगातार मेहनत की।
हर पर्व पर करते हैं माता के दर्शन
अनिकेत चौबे का मां महामाया देवी के प्रति विशेष लगाव रहा है। वर्षभर में आने वाले विभिन्न पर्वों और अवसरों पर वे माता के दर्शन के लिए देऊरगांव पहुंचते हैं। इसी आस्था के चलते उन्होंने संकल्प लिया था कि नौकरी लगने के बाद अपनी पहली सैलरी से मां महामाया देवी को रजत मुकुट अर्पित करेंगे। बुधवार को विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद रजत मुकुट माता को अर्पित किया गया। इस अवसर पर परिवारजनों एवं श्रद्धालुओं ने माता का आशीर्वाद लिया।



