राज नेशनल न्यूज़ विश्वराज ताम्रकार दुर्ग । आधुनिक जीवन की भागदौड़ में जहाँ अधिकांश लोग धन-संपत्ति और भौतिक सुख-सुविधाओं को ही सफलता का पैमाना मानने लगे हैं, वहीं समाज में एक बार फिर यह संदेश जोर पकड़ रहा है कि इंसान की सबसे बड़ी पूंजी उसका बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि माता-पिता का आशीर्वाद और उनकी दुआएं होती हैं।
बुजुर्गों का कहना है कि जिस परिवार में माता-पिता का सम्मान किया जाता है, वहाँ सुख, शांति और समृद्धि स्वयं निवास करती है। जीवन में कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी माता-पिता का आशीर्वाद संबल बनकर सफलता की राह आसान करता है। धन-दौलत समय के साथ कम या अधिक हो सकती है, लेकिन माता-पिता का स्नेह, त्याग और आशीर्वाद अमूल्य होता है, जिसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती।
समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकालकर माता-पिता की सेवा करें, उनका सम्मान करें और उनकी भावनाओं का आदर करें। यही सच्ची सफलता और वास्तविक समृद्धि का आधार है।
“दुनिया की सबसे बड़ी दौलत बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि माँ-बाप की दुआएं होती हैं।” यह संदेश हर व्यक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए, क्योंकि माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
— श्री मति संतोष ताम्रकार की कलम से



