
तहसील कार्यालयों में सौंपा ज्ञापन, पूर्व में दिए आश्वासनों को पूरा नहीं करने पर जताई नाराजगी
राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़-छुईखदान-गंडई : प्रदेश के किसानों की विभिन्न समस्याओं और 12 सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ ने 16 सितंबर को प्रदेशभर के तहसील मुख्यालयों में एक साथ ज्ञापन सौंपकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की शुरुआत की। संगठन ने पूर्व में किए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की।
भारतीय किसान संघ के अनुसार किसानों की समस्याओं को लेकर पूर्व में भी आंदोलन किया गया था। उस दौरान प्रदेश के शिक्षा मंत्री आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे और किसानों की कुछ मांगों को स्वीकार करते हुए उनके निराकरण का आश्वासन दिया था। संघ का कहना है कि धान की तौल 40 किलो 700 ग्राम किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक इस संबंध में स्पष्ट और प्रभावी आदेश लागू नहीं हुआ है।
1700 करोड़ रुपए की लंबित राशि देने की मांग
संघ की प्रमुख मांगों में गौवंदन योजना को प्रदेश में लागू करना, जी राम जी योजना को गौ संरक्षण एवं संवर्धन से जोड़ना, धान खरीदी वर्ष 2022-23 की किसानों की लंबित लगभग 1700 करोड़ रुपए की राशि तत्काल भुगतान करना तथा समर्थन मूल्य में प्रतिवर्ष कृषक उन्नति योजना के तहत 800 रुपए प्रति क्विंटल जोड़ना शामिल है। सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को भी कृषक उन्नति योजना का लाभ देने की मांग की गई है।
संघ ने धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक करने तथा प्रत्येक तौल में 40 किलो 700 ग्राम धान लेने का स्पष्ट एवं अनिवार्य आदेश जारी करने की मांग की है। एग्रीस्टेक पंजीयन में आ रही समस्याओं को देखते हुए प्रक्रिया में शिथिलता देने और धान खरीदी की टोकन व्यवस्था में सुधार की मांग भी रखी गई है।
टोकन व्यवस्था में सुधार की मांग
संगठन ने बड़े किसानों को पांच तथा लघु एवं सीमांत किसानों को आवश्यकता के अनुसार तीन एवं एक टोकन देने की मांग की है। धान खरीदी के दौरान अनावश्यक दबाव डालकर खाता समर्पण कराने की प्रक्रिया बंद करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
इसके अलावा गन्ने के मूल्य में 150 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि कर उसे कृषक उन्नति योजना से जोड़ने, अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने और सिंचाई की व्यापक संभावनाओं वाली पैरी हाईडेम योजना को तत्काल स्वीकृति देने की मांग की गई।
प्रधानपाठ बैराज का गेट सुधारने की मांग
भारतीय किसान संघ ने विद्युत विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने, निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने तथा भूमि अधिग्रहण में उदयपुर डिक्लेरेशन के अनुसार प्रक्रिया अपनाने की मांग की।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला अध्यक्ष हर्ष दशरिया ने कहा कि संगठन किसानों की समस्याओं को लेकर लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित करता रहा है। पूर्व आंदोलन के दौरान दिए गए कई आश्वासन अब तक धरातल पर लागू नहीं हुए हैं। विशेष रूप से धान तौल की 40 किलो 700 ग्राम व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं होने से किसानों में नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान आंदोलन केवल नई मांगों को लेकर नहीं, बल्कि किसानों से किए गए पूर्व आश्वासनों को पूरा कराने और सरकार को उसके वादों की याद दिलाने के लिए भी है।
संघ ने प्रधानपाठ बैराज का टूटा गेट जल्द सुधारने की मांग की, ताकि किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सके। इसके साथ ही भंडारपुर से आगे बढ़ईटोला, भरदाकला, देवारीभाठ, सहसपुर, मदराकुही, सोनभट्ठा, मुड़भादूर और अवेली सलौनी तक नहर विस्तार की मांग की गई है, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा मिल सके।
भारतीय किसान संघ ने चेतावनी दी कि ज्ञापन और वर्तमान आंदोलन के बाद भी यदि किसानों की मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आगामी चरण में इससे व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ज्ञापन के दौरान प्रदेश के विभिन्न तहसील मुख्यालयों में भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी, जिला एवं तहसील स्तर के कार्यकर्ता, किसान प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।



