
राज नेशनल न्यूज़ विश्वराज ताम्रकार
बारिश का मौसम
और स्कूल जाने का मजा
एक ही छतरी पर तीन-चार दोस्तों का एक साथ जाना
अपने-अपने तरफ छाता को खींचना
हम भी भीगते हमारे बस्ते भी भीगते
ड्रेस में कीचड़ लगने का डर
जूता खराब होने का डर
स्कूल लेट पहुंचने का डर
एक अलग ही मजा होता था
खुशी तो तब मिलती थी
जब कक्षा में बैठने की जगह नहीं होती थी
और छुट्टी की घंटी बज जाती थी
सच में जो मजा हमें
बचपन में स्कूल जाने में
बारिश की दिनों में मिलता था
वह मजा अब कहां
हां गांव की स्कूलों में वह बचपन आज भी है
वह बारिश आज भी है



