
खेती से नहीं चल पा रहा था परिवार का खर्च, अब दूध बेचकर हर महीने कमा रहीं 31,500 रुपए
राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़ : कभी खेती की सीमित आमदनी से परिवार का खर्च चलाने में मुश्किलों का सामना करने वाली छुईखदान विकासखंड की माधुरी जंघेल आज डेयरी व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भर बन गई हैं। पशुपालन विभाग की योजना का लाभ लेकर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। वर्तमान में उन्हें दूध बेचकर हर महीने करीब 31,500 रुपए की आमदनी हो रही है। खर्च निकालने के बाद लगभग 20 हजार रुपए की बचत हो रही है।
70 हजार रुपए का मिला अनुदान
माधुरी और उनके पति मुन्ना जंघेल पहले खेती पर निर्भर थे। सीमित आमदनी के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल था। इसी दौरान पशुधन विकास विभाग के सहयोग से उन्हें राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत आर्थिक सहायता मिली। वर्ष 2024-25 में डेयरी इकाई की एक लाख 40 हजार रुपए की लागत पर 50 प्रतिशत यानी 70 हजार रुपए का अनुदान दिया गया। इस सहायता से उन्होंने उन्नत नस्ल की गाय खरीदकर दूध उत्पादन का व्यवसाय शुरू किया।
रोजाना 30 लीटर दूध का उत्पादन
माधुरी वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध का उत्पादन कर रही हैं। वे इसे 35 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचती हैं। इससे उन्हें नियमित आमदनी हो रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के तहत पशुओं की नस्ल सुधार में भी सहयोग मिला है।
पशुधन विकास विभाग की ओर से समय-समय पर पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, कृमिनाशक दवाइयां, पशु आहार संबंधी सप्लीमेंट और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाता है।
गोपाल रत्न पुरस्कार से भी मिला सम्मान
डेयरी व्यवसाय में परिवार की मेहनत और शासकीय योजनाओं के सहयोग से आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। माधुरी के पति मुन्ना जंघेल को अहमदाबाद, गुजरात में आयोजित गोपाल रत्न पुरस्कार कार्यक्रम में सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें दो लाख रुपए की पुरस्कार राशि भी मिली है।
माधुरी जंघेल की यह सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और डेयरी व्यवसाय के माध्यम से स्वरोजगार अपनाने की प्रेरक मिसाल है। यह कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर मेहनत और लगन से आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह बनाई जा सकती है।



