
राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़ : जिले में किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य तेल उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित उद्यानिकी विभाग की एडिबल ऑयल पाम योजना के तहत ग्राम भरकाटोला में किए जा रहे पौधरोपण कार्य का कलेक्टर ने निरीक्षण किया। उन्होंने किसान जीतराम साहू के खेत में लगाए गए ऑयल पाम पौधों की वृद्धि, रखरखाव एवं पौधों के बीच लगाई गई बैंगन की अंतरवर्ती फसल का अवलोकन किया। कलेक्टर ने किसानों से चर्चा कर अंतरवर्ती खेती से हो रही अतिरिक्त आय की जानकारी ली तथा अधिक से अधिक किसानों को व्यावसायिक एवं लाभकारी खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान सहायक संचालक उद्यान स्नेहलता सिंह ने बताया कि जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान 26.631 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों द्वारा ऑयल पाम पौधों का रोपण किया गया है। पौधों के बेहतर रखरखाव के लिए किसानों को द्वितीय वर्ष में प्रति हेक्टेयर 5 हजार 250 रुपये का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। साथ ही पौधे छोटे रहने के कारण खाली भूमि का उपयोग करते हुए अंतरवर्ती सब्जी फसल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 5 हजार 250 रुपये मूल्य का सब्जी बीज भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसान ऑयल पाम के उत्पादन प्रारंभ होने तक नियमित अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ऑयल पाम एक दीर्घकालिक एवं लाभकारी फसल है। प्रारंभिक वर्षों में किसान पौधों के बीच उपलब्ध स्थान पर बैंगन सहित अन्य सब्जियों की खेती कर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। ऑयल पाम के परिपक्व होने पर एक हेक्टेयर क्षेत्र से औसतन 4 टन उत्पादन प्राप्त होने की संभावना रहती है, जिससे किसानों को प्रति हेक्टेयर लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक वार्षिक आय प्राप्त हो सकती है।
सहायक संचालक उद्यान ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले को ऑयल पाम विस्तार के लिए 50 हेक्टेयर का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध प्रथम चरण में 30 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए किसानों का चयन किया जा चुका है तथा चयनित किसानों के यहां पौधरोपण का कार्य प्रगति पर है। विभाग द्वारा अन्य इच्छुक किसानों को भी योजना की जानकारी देकर इससे जोड़ने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने किसानों से कहा कि पारंपरिक खेती के साथ व्यावसायिक फसलों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने अंतरवर्ती खेती की पद्धति को आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए किसानों से अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा करने और उन्हें भी योजना से जोड़ने का आग्रह किया।
उद्यानिकी विभाग के अनुसार योजना के अंतर्गत किसानों को पौधरोपण सामग्री पर 100 प्रतिशत सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा रखरखाव, अंतरवर्ती फसल, ड्रिप सिंचाई, नलकूप, पम्पसेट, जल संरक्षण संरचना, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट तथा फेंसिंग जैसी सुविधाओं पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अनुदान दिया जाता है। इससे किसानों की प्रारंभिक लागत कम होने के साथ आधुनिक उद्यानिकी खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
विभाग ने बताया कि योजना का उद्देश्य प्रदेश में ऑयल पाम का रकबा बढ़ाकर खाद्य तेल उत्पादन में वृद्धि करना, खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करना तथा किसानों को दीर्घकालिक एवं स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराना है। योजना के तहत किसानों को अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण पौधे, तकनीकी मार्गदर्शन तथा उत्पादन के विपणन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ उचित बाजार भी सुनिश्चित हो सके।



