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कॉर्पोरेट-सरकार की जुगलबंदी से जनता पर ‘डिजिटल डाका’: 28 दिन के खेल में 13वें महीने की ठगी, मोबाइल कंपनियों के खिलाफ फुटा जनाक्रोश

महामहिम राष्ट्रपति के नाम SDM गंडई को सौंपा ज्ञापन;

किसान नेता ठाकुर रणजीत सिंह चंदेल ने दागे तीखे सवाल, कहा—’TRAI मौन, केंद्र का संरक्षण और जनता की जेब पर सरेआम डकैती’

राज नेशनल न्यूज़ गंडई पंडरिया : देश में तेजी से बढ़ते मोबाइल रिचार्ज के दामों, कंपनियों की मनमानी और उपभोक्ता विरोधी नीतियों के खिलाफ किसान नेता ठाकुर रणजीत सिंह चंदेल के नेतृत्व व साथ में पार्षद दिलीप ओगरें ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM) गंडई को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रेस को जारी अपने कड़े और विस्फोटक बयान में चंदेल ने टेलिकॉम कंपनियों (Jio, Airtel, idia) और नियामक संस्था ट्राइ (TRAI) पर ‘संगठित आर्थिक शोषण’ का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “डिजिटल इंडिया” के नाम पर आज देश के गरीब किसानों, मजदूरों, युवाओं और छोटे दुकानदारों को कॉर्पोरेट लूट का शिकार बनाया जा रहा है।

शोषण का मकड़जाल: मोबाइल कंपनियों के 5 बड़े ‘डिजिटल घोटाले’

​ज्ञापन के माध्यम से किसान नेता ने टेलिकॉम कंपनियों की मनमानी और उपभोक्ता शोषण के प्रमुख पहलुओं को उजागर करते हुए केंद्र सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं:

1. 28 दिनों का छलावा: 12 महीने के नाम पर 13 महीने की वसूली
कंपनी की सबसे बड़ी ‘वैध ठगी’ कैलेंडर के साथ खिलवाड़ है। 30 या 31 दिन के महीने में 28 दिन की वैलिडिटी देकर कंपनियां साल भर में उपभोक्ता से 13वें महीने का रिचार्ज जबरन वसूल लेती हैं। इस गणितीय जालसाजी से कंपनियां सालाना हजारों करोड़ रुपये जनता की जेब से ऐंठ रही हैं।

2. कीपैड फोन यूजर्स पर ‘डेटा का डाका’
गांवों और दूर-दराज के इलाकों में आज भी करोड़ों बुजुर्ग, किसान और मजदूर केवल बातचीत के लिए साधारण ‘कीपैड फोन’ का इस्तेमाल करते हैं। वे इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते, फिर भी टेलिकॉम कंपनियों ने कॉलिंग प्लान्स से डेटा का विकल्प हटाकर जबरन महंगा डेटा प्लान थोप दिया है।

3. रात 12 बजे का ‘डाका’— उपभोक्ता का पैसा, डेटा गायब!

उपभोक्ता जिस डेटा का पूरा भुगतान करता है, वह दिन खत्म होते ही यानी रात 12 बजे लैप्स (रद्द) हो जाता है। “पैसा पूरा, तो सेवा आधी क्यों?” सवाल उठाते हुए चंदेल ने कहा कि उपभोक्ता का बचा हुआ डेटा अगले दिन ट्रांसफर (Carry-Forward) क्यों नहीं किया जाता? बचा हुआ डेटा हड़पना सीधे-सीधे उपभोक्ता अधिकारों का हनन है।

4. कॉलिंग और डेटा की ‘अनिवार्य टैगिंग’ का खेल
उपभोक्ता को सिर्फ कॉलिंग चाहिए हो तो भी उसे डेटा का रिचार्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है। अपनी पसंद की सेवा चुनने की आजादी छीनकर कंपनियों ने एक एकाधिकारवादी (Monopolistic) साम्राज्य कायम कर लिया है।

5. हर वर्ग पर चौतरफा आर्थिक मार किसान व मजदूर: दैनिक मजदूरी का बड़ा हिस्सा अब सिर्फ फोन चालू रखने में खर्च हो रहा है।
छात्र व युवा: ऑनलाइन पढ़ाई और रोजगार खोज रहे युवाओं के मासिक बजट पर यह अतिरिक्त बोझ है।
छोटे व्यापारी: लगातार बढ़ती संचार लागत से छोटे दुकानदारों का मुनाफा घट रहा है।
“TRAI बना मूकदर्शक, केंद्र दे रहा संरक्षण”

“आज मोबाइल कोई विलासिता (Luxury) नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी आवश्यकता है। जब पैसे पूरे 30 दिनों के लिए जाते हैं, तो सुविधा 28 दिन की क्यों? जब डेटा का भुगतान उपभोक्ता करता है, तो वो लैप्स क्यों होता है? केंद्र सरकार और TRAI का इस खुली लूट पर मौन रहना यह साबित करता है कि यह सब कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी संरक्षण में हो रहा है।”
— ठाकुर रणजीत सिंह चंदेल (किसान नेता)

महामहिम राष्ट्रपति से की गई 3 प्रमुख मांगें:
केवल कॉलिंग/SMS वाले सस्ते प्लान: कीपैड और साधारण फोन यूजर्स के लिए बिना डेटा वाले बेहद सस्ते टॉकटाइम प्लान तुरंत बहाल किए जाएं।
डेटा कैरी-फॉरवर्ड नियम: स्मार्टफोन उपभोक्ताओं का बचा हुआ डेटा वेस्ट (रद्द) करने के बजाय अगले दिन या अगले रिचार्ज चक्र में जोड़ा जाए।
सख्त 30/31 दिन की वैलिडिटी: 28 दिन के फर्जी वैलिडिटी चक्र को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर वास्तविक मासिक (30 दिन) रिचार्ज नियम लागू हो।
उग्र जन-आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपते हुए किसान नेता ठाकुर रणजीत सिंह चंदेल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि महामहिम राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के बाद भी केंद्र सरकार और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने इन उपभोक्ता विरोधी नीतियों पर तुरंत रोक नहीं लगाई और कंपनियों को जनहितैषी कदम उठाने पर मजबूर नहीं किया, तो इस नीतिगत शोषण के खिलाफ सड़कों पर ‘उग्र जन-आंदोलन’ छेड़ा जाएगा।

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