
राज नेशनल न्यूज़ गंडई-पंडरिया / छुईखदान —
महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर जनपद पंचायत छुईखदान के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत दनिया में रोजगार की मांग को लेकर एक विशेष एवं ऐतिहासिक पहल की गई। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने एकजुट होकर रोजगार का संकल्प लिया और मनरेगा योजना के तहत काम की पुरजोर मांग उठाई।
स्वावलंबन और अधिकारों की ओर एकजुट कदम
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला संयोजक रणजीत सिंह चंदेल की प्रमुख उपस्थिति में गाँव के लगभग 40 महिला एवं पुरुष ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। “हर हाथ को काम, हर हाथ को सम्मान” के नारे के साथ बापू के विचारों और ग्राम स्वराज के स्वप्न को याद करते हुए गाँव के समग्र विकास और आजीविका का संकल्प लिया गया।
इस दौरान उपस्थित श्रमिकों ने एक राय होकर शासन द्वारा निर्धारित फॉर्म-6 (आवेदन प्रपत्र) भरा और ग्राम पंचायत में रोजगार हेतु विधिवत अपना आवेदन प्रस्तुत किया।
मनरेगा योजना के कानूनी प्रावधान और अधिकार
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को योजना से जुड़े महत्वपूर्ण वैधानिक अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई:
- 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी: मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम का कानूनी अधिकार मिलता है।
- फॉर्म-6 और अनिवार्य पावती: रोजगार की मांग के लिए फॉर्म-6 भरकर पंचायत में देना होता है, जिसके एवض में मिलने वाली रसीद (पावती) आवेदन की तिथि का कानूनी प्रमाण होती है।
- 15 दिनों के भीतर काम या बेरोजगारी भत्ता: नियम के अनुसार, फॉर्म-6 में आवेदन जमा करने के 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य है। ऐसा न होने पर श्रमिकों को नियमानुसार बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकार है।
- कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधाएं: काम की जगह पर पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा किट, छाया और बच्चों की देखभाल जैसी सुविधाएं देना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
- स्थानीय स्तर पर आजीविका: इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण पलायन को रोकना और स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
समय-सीमा के भीतर रोजगार या भत्ते की स्पष्ट मांग
ग्राम पंचायत दनिया के ग्रामीणों और आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य हर नागरिक को उसका अधिकार दिलाना और ग्रामीण विकास को गति देना है।
ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन के समक्ष दो टूक मांग रखी है कि यदि निर्धारित 15 दिन की समय-सीमा के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उन्हें नियमानुसार बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाए। इस अनूठी पहल से पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों में अपने कानूनी अधिकारों के प्रति एक नई जागरूकता देखने को मिल रही है।



