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सेवा की कहानी : डबरी में संजोया पानी, खेत में लहलहाई फसल और मछली पालन से बढ़ी आय की उम्मीद

राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़, 23 सितम्बर // सेवा संकल्प अभियान के तहत योजनाओं के अभिसरण से ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से किसानों को नई संभावनाएं मिल रही हैं। विकासखंड छुईखदान के ग्राम पंचायत कानीमेरा के किसान  अशोक कुमार सिरदार की आजीविका डबरी इसका उदाहरण है। कभी केवल जल-संरक्षण की परिसंपत्ति के रूप में निर्मित यह डबरी अब खेती और मछली पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर भी उपलब्ध करा रही है।

वीबी-जी राम जी योजना के तहत जनवरी 2026 में 1.99 लाख रुपये की लागत से  अशोक कुमार सिरदार के लिए आजीविका डबरी स्वीकृत की गई। गांव के श्रमिकों द्वारा अप्रैल 2026 में इसका निर्माण पूरा किया गया। बारिश के पानी के संचय से डबरी अब खेती के लिए उपयोगी जलस्रोत के रूप में काम कर रही है और इसका लाभ आसपास की कृषि गतिविधियों को मिल रहा है।

अशोक कुमार सिरदार ने डबरी के आसपास लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में धान की खेती की है। वहीं डबरी की मेड़ पर अरहर की फसल लगाई गई है। इससे एक ही स्थान पर मुख्य फसल के साथ अतिरिक्त फसल का भी लाभ मिल रहा है। डबरी को मत्स्य पालन गतिविधि से जोड़ते हुए जुलाई माह में उन्हें रोहू, कतला और मृगल प्रजाति के 50 पैकेट मछली बीज अनुदान के रूप में उपलब्ध कराए गए, जिसके बाद डबरी में मछली पालन भी शुरू किया गया।

इस तरह डबरी निर्माण, कृषि और मत्स्य पालन को आपस में जोड़कर एक ही परिसंपत्ति का बहुउद्देशीय उपयोग सुनिश्चित किया गया है। डबरी में संचित पानी खेती को सहारा दे रहा है, मेड़ पर अरहर से अतिरिक्त फसल मिल रही है और मछली पालन से आने वाले समय में अतिरिक्त आमदनी की संभावना बनी है।

किसान अशोक कुमार सिरदार के लिए यह पहल जल-संरक्षण के साथ आजीविका के विविध अवसरों का आधार बन रही है। योजनाओं के अभिसरण से तैयार परिसंपत्ति का उपयोग अब पानी के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती और मत्स्य पालन को भी इससे जोड़ा गया है। इससे ग्रामीण संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ परिवार की आजीविका को मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

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