राज नेशनल न्यूज़ दुर्ग : सिर्फ एक कोना चाहिए….
मैं मालकिन हूं घर की पर मुझे एक कोना चाहिए
बाबुल के आंगन में एक छोटा सा कोना चाहिए
ससुराल की दहलीज में एक छोटा सा कोना चाहिए
ढूंढती हूं मैं हर पल अपने लिए जिस जगह को मैं अपना कह सकूं
एक टेबल कुर्सी सिर्फ मेरा हो
जिसमें मेरी किताबें डायरी सलीके से रखा हो
दिन भर के थकान को बाहर खिड़की से प्रकृति का नजारा देखकर मिटा सुकून बस मुझे एक कोना चाहिए…
कहने को तो सारा घर मेरा है
पर मुझे अपनी चीज दिखती नहीं है
अलमीरा सजाती हूं मैं सभी की
पर अपनी ही चीज व्यवस्थित नहीं कर पाती
क्यों एक स्त्री की कोई जगह नहीं होती
मायके में पापा के घर
ससुराल में पति के घर
और जब बच्चे बड़े हो जाते हैं
तब बच्चों का घर
बस ढूंढती हूं मैं अपने लिए एक छोटा सा कोना
जिसे मैं अपना कह सकूं सिर्फ एक कोना…



