‘आदि अमितान’ अभियान से बैगा बस्तियों तक पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं
राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़ : खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति (पी.वी.टी.जी.) बैगा समुदाय के लिए संचालित “आदि अमितान” पी.एम. जनमन यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग अभियान प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा के मार्गदर्शन में छुईखदान विकासखंड नोडल अधिकारी डॉ. मनीष बघेल एवं बीपीएम बृजेश ताम्रकार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम बैगा परिवारों तक घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है।
विकासखंड छुईखदान के 38 ग्रामों में निवासरत 4,819 बैगा समुदाय के प्रत्येक परिवार तक स्वास्थ्य टीम पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। अभियान का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति की समय पर स्वास्थ्य जांच कर गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करना है।
अभियान के तहत प्रत्येक हितग्राही का व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार किया जा रहा है। साथ ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सिकल सेल रोग, एनीमिया, स्तन एवं सर्वाइकल कैंसर, मोतियाबिंद, टीबी, मलेरिया, कुष्ठ रोग सहित अन्य बीमारियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। आवश्यकता अनुसार मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के साथ उच्च स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर भी किया जा रहा है।
अभियान के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी 0 से 2 वर्ष का बच्चा अथवा गर्भवती महिला स्वास्थ्य सेवाओं एवं टीकाकरण से वंचित न रहे। छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण तथा गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है।
गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले हितग्राहियों को जिला प्रशासन द्वारा संचालित निःशुल्क “आदि आरोग्य रथ” के माध्यम से उच्च स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाकर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
अभियान के तहत अब तक 1,109 बैगा हितग्राहियों की स्वास्थ्य जांच कर उनका व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार किया जा चुका है। इनमें 27 मरीजों को उच्च उपचार के लिए रेफर किया गया है, जिनमें 18 उच्च रक्तचाप के मरीज, 1 पी.एफ. मलेरिया का मरीज तथा 8 एनीमिक गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। सभी को समय पर भर्ती कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया।
“आदि अमितान” अभियान के माध्यम से दूरस्थ बैगा बस्तियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है। इससे विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को उनके घर के समीप ही समयबद्ध स्वास्थ्य जांच, परामर्श, उपचार एवं रेफरल की सुविधा मिल रही है।



