KCGखास खबरछत्तीसगढ़

सेवा की कहानी: अध्ययन भ्रमण से आधुनिक मत्स्य पालन की नई राह

सेवा संकल्प अभियान के तहत 20 मत्स्य कृषकों को मिला राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण और 10 दिवसीय प्रशिक्षण का अवसर

राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़  // सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत मछली पालन विभाग द्वारा जिले के मत्स्य कृषकों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक मत्स्य पालन तकनीकों से जोड़ने की दिशा में पहल की गई। वर्ष 2025-26 में ‘मछुआरों का राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण’ योजना के तहत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के 20 मत्स्य कृषकों को राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण एवं 10 दिवसीय प्रशिक्षण का अवसर मिला। इनमें 10 अनुसूचित जनजाति, 7 अनुसूचित जाति और 3 अन्य पिछड़ा वर्ग के मत्स्य कृषक शामिल रहे।

अध्ययन भ्रमण के दौरान मत्स्य कृषकों ने उन्नत मत्स्य फार्मों का अवलोकन किया और वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन की प्रक्रिया को करीब से समझा। प्रशिक्षण में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज का चयन, तालाब की तैयारी, जल गुणवत्ता प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, मछलियों के पोषण और संतुलित आहार प्रबंधन जैसी तकनीकों की जानकारी दी गई।

भ्रमण के दौरान पैंगेसियस तथा भारतीय प्रमुख कार्प प्रजातियों रोहू, कतला और मृगल की हैचरी का भी अवलोकन कराया गया। मत्स्य कृषकों ने मत्स्य बीज उत्पादन, हैचरी संचालन और गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने की प्रक्रिया को समझा। जिले में इस प्रकार की हैचरी उपलब्ध नहीं होने के कारण यह जानकारी उनके लिए विशेष उपयोगी रही। इससे भविष्य में स्थानीय स्तर पर हैचरी स्थापना और रोजगार के नए अवसरों की संभावनाओं की जानकारी भी मिली।

राज्य के बाहर सफल मत्स्य पालकों के फार्मों का भ्रमण कर कृषकों ने व्यावसायिक स्तर पर मत्स्य पालन के तौर-तरीकों को जाना। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, उत्पादन प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से मत्स्य पालन को अधिक व्यवस्थित बनाने की जानकारी उन्हें प्राप्त हुई।

अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण से प्राप्त तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान अब जिले के मत्स्य कृषकों के लिए नई संभावनाओं का आधार बन रहा है। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, बेहतर तालाब प्रबंधन, संतुलित आहार और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने की दिशा में वे आगे बढ़ सकेंगे।

सेवा संकल्प अभियान 2026 के माध्यम से विभागीय योजनाओं का उद्देश्य केवल योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही नहीं, बल्कि हितग्राहियों को ज्ञान, कौशल और नई तकनीकों से जोड़कर उनकी आजीविका को सशक्त बनाना भी है। जिले के 20 मत्स्य कृषकों का यह अध्ययन भ्रमण इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button