
राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़ : शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रावल के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण में उद्योग विभाग के महाप्रबंधक श्री बघेल और आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त स्वर्णिम शुक्ला ने मास्टर ट्रेनर के रूप में अधिकारियों-कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में जिला स्तरीय अधिकारी-कर्मचारियों के साथ चार विकासखंड स्तरीय प्रशिक्षक भी शामिल हुए।
समयसीमा में जानकारी देना जरूरी
प्रशिक्षण में बताया गया कि सूचना का अधिकार नागरिकों को शासकीय कार्यों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है। अधिकारियों-कर्मचारियों को आवेदन प्रक्रिया, सूचना उपलब्ध कराने की समयसीमा और अपील व्यवस्था की जानकारी होना जरूरी है। कार्यालयों में अभिलेखों का व्यवस्थित संधारण करने से आवेदनों का समय पर निराकरण करने और सही जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
30 दिन में देना होता है जवाब
मास्टर ट्रेनरों ने अधिनियम की प्रमुख धाराओं की जानकारी देते हुए बताया कि धारा 4 और 5 के तहत अभिलेखों के संधारण, विभागीय जानकारी के प्रकाशन और जनसूचना अधिकारियों की भूमिका का विशेष महत्व है। सूचना मांगने के लिए आवेदक को कारण बताना आवश्यक नहीं है। आवेदन किसी अन्य लोक प्राधिकारी से संबंधित होने पर उसे अधिकतम पांच दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकारी को स्थानांतरित कर आवेदक को इसकी सूचना देना होता है।
धारा 7 के अनुसार सामान्यतः 30 दिनों के भीतर आवेदन पर निर्णय देना आवश्यक है। वहीं, किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित सूचना 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। निर्धारित समयसीमा में सूचना नहीं मिलने पर नियमानुसार जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। आवेदन अस्वीकार करने की स्थिति में संबंधित कारण और अपील के अधिकार की जानकारी देना भी जरूरी है।
लापरवाही पर अर्थदंड का प्रावधान
प्रशिक्षण में अपील व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया गया कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने या निर्णय से असंतुष्ट होने पर आवेदक प्रथम अपील कर सकता है। इसके बाद संबंधित सूचना आयोग में द्वितीय अपील की व्यवस्था है। बिना उचित कारण सूचना देने में देरी करने या जानबूझकर गलत, अधूरी अथवा भ्रामक जानकारी देने पर अधिनियम की धारा 20 के तहत अर्थदंड लगाया जा सकता है।
प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों-कर्मचारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करने, अभिलेखों का उचित संधारण करने तथा नागरिकों के आवेदनों का जिम्मेदारीपूर्वक और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया।



