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कभी-कभी अकेलापन भी भगवान का संकेत होता है-विश्वराज ताम्रकार की कलम से

राज नेशनल न्यूज़ : आज के दौर में जब इंसान भीड़ के बीच रहकर भी खुद को अकेला महसूस करता है, तब जीवन के कुछ पल हमें भीतर से बहुत कुछ समझाने आते हैं। कभी-कभी हमें लगता है कि हमारे अपने हमसे दूर क्यों हो गए, रिश्ते क्यों बदल गए और जिन पर हमने भरोसा किया, वही हमें छोड़कर क्यों चले गए।


लेकिन शायद हर बिछड़ना हमारी हार नहीं होता। कुछ लोगों का हमारी जिंदगी से चले जाना भी ईश्वर की एक ऐसी योजना हो सकती है, जिसे हम उस समय समझ नहीं पाते।
अगर आज आपकी जिंदगी में पहले जैसे लोग नहीं हैं, तो खुद को बदकिस्मत समझने की जरूरत नहीं है। हो सकता है, ईश्वर आपको उन रिश्तों से दूर कर रहे हों, जो आपके भविष्य के लिए सही नहीं थे। जिनके जाने से आज आंखों में आंसू हैं, संभव है कल वही दूरी आपके जीवन का सबसे बड़ा सुकून बन जाए।


हम अक्सर किसी के चले जाने के बाद उसी के बारे में सोचकर दुखी होते रहते हैं। लेकिन जिंदगी का सच यही है कि हर इंसान हमारी पूरी जिंदगी का हिस्सा बनने के लिए नहीं आता। कुछ लोग साथ चलने आते हैं, कुछ हमें कुछ सिखाने आते हैं और कुछ हमें मजबूत बनाकर अपनी राह चले जाते हैं।
इसलिए जो चला गया, उसे जाने दीजिए।
हर रिश्ते को बचाए रखना जरूरी नहीं, कभी-कभी खुद को बचाए रखना ज्यादा जरूरी होता है।
अगर आज आप अकेले हैं, तो घबराइए मत। यह अकेलापन शायद आपके जीवन के किसी नए अध्याय की शुरुआत हो। हो सकता है, ईश्वर आपके जीवन में कुछ ऐसा भेजने की तैयारी कर रहे हों, जिसके सामने आपका पुराना दर्द बहुत छोटा लगने लगे।
भरोसा रखिए… कहानी अभी बाकी है।
जो खोया है, उसके लिए मत रोइए; जो आने वाला है, उसके लिए अपने दिल में जगह बनाए रखिए।

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