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जन्मदिन पर बेसहारा बुजुर्गों की सेवा, आश्रम में कराया भोजन

संदीप ताम्रकार परिवार की 24 वर्षों से चली आ रही सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण की परंपरा

राज नेशनल न्यूज़ दुर्ग /भिलाई :  जन्मदिन को केवल उत्सव के रूप में मनाने के बजाय सेवा और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की प्रेरणादायी पहल सामने आई है। फील परमार्थ फाउंडेशन, सेक्टर-3 भिलाई द्वारा संदीप ताम्रकार के जन्मदिन के अवसर पर आश्रम में निवासरत बेसहारा एवं जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए भोजन की व्यवस्था कर सेवा कार्य किया गया।


रक्षाबंधन पर्व से दो दिन पूर्व आयोजित इस सेवा कार्य के दौरान आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के साथ समय बिताया गया और उन्हें भोजन कराया गया। इस अवसर पर बुजुर्गों का आशीर्वाद भी लिया गया। फाउंडेशन का उद्देश्य आश्रय में रहने वाले बुजुर्गों एवं मानसिक रूप से कमजोर लोगों को आवश्यक सहयोग एवं सेवा उपलब्ध कराना है


जन्मदिन को सेवा से जोड़ने की 24 साल पुरानी परंपरा

संदीप ताम्रकार के परिवार में जन्मदिन मनाने की यह परंपरा विशेष रूप से उल्लेखनीय है। विवाह उपरांत विगत 24 वर्षों से परिवार के सदस्यों के जन्मदिन को सेवा कार्यों के माध्यम से मनाने की परंपरा निरंतर जारी है। परिवार के किसी सदस्य का जन्मदिन हो, उस अवसर पर जरूरतमंदों की सेवा, आश्रम में भोजन कराने तथा सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जनसेवा जैसे कार्य किए जाते हैं।


संदीप ताम्रकार की पदस्थापना जिन-जिन जिलों में रही, वहां भी परिवार के सदस्यों के जन्मदिन इसी सेवा भावना के साथ स्थानीय सेवा संस्थाओं एवं आश्रमों में मनाए जाते रहे हैं। इस दौरान परिवार द्वारा समाज के जरूरतमंद वर्ग के बीच पहुंचकर सेवा और सहयोग को प्राथमिकता दी जाती है।

सेवा के साथ वृक्षारोपण का भी संकल्प
परिवार की इस परंपरा में सेवा कार्यों के साथ वृक्षारोपण को भी विशेष स्थान दिया गया है। जन्मदिन के अवसर पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाता है। परिवार का मानना है कि जन्मदिन का वास्तविक महत्व तभी है, जब इस अवसर पर समाज और प्रकृति के लिए कोई सकारात्मक कार्य किया जाए।
फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग सम्मान और संवेदना के पात्र हैं। उनके साथ कुछ समय बिताना, उनकी जरूरतों को समझना और यथासंभव सहयोग करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। संदीप ताम्रकार के जन्मदिन पर किया गया यह सेवा कार्य इसी मानवीय भावना का उदाहरण है।
परिवार द्वारा बुजुर्गों को भगवान के विशेष स्वरूप के रूप में मानते हुए उनके आशीर्वाद प्राप्त करने की भावना से सेवा कार्य किया गया। 24 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी सेवा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण की भावना के साथ निरंतर जारी है।

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