
दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
राज नेशनल न्यूज़ खैरागढ़ : समग्र शिक्षा के समावेशी शिक्षा कार्यक्रम अंतर्गत जिले के दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकतानुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तथा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से 26 अक्टूबर को सेजेस शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खैरागढ़ में दिव्यांग बच्चों के आकलन एवं मूल्यांकन शिविर का आयोजन किया गया। एलिंको कानपुर एवं समाज कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस शिविर में विशेषज्ञों द्वारा बच्चों की दिव्यांगता एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं का आकलन कर सहायक उपकरणों के लिए चिन्हांकन किया गया।
शिविर में खैरागढ़ एवं छुईखदान विकासखंड के कुल 80 दिव्यांग बच्चों ने भाग लिया। इनमें खैरागढ़ विकासखंड के 66 तथा छुईखदान विकासखंड के 14 बच्चे शामिल थे। एलिंको कानपुर की विशेषज्ञ टीम द्वारा बच्चों का परीक्षण एवं मूल्यांकन कर 60 बच्चों के लिए कुल 105 सहायक उपकरणों हेतु माप एवं चिन्हांकन की प्रक्रिया पूरी की गई। इससे चिन्हांकित बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है।
शिविर का उद्देश्य
शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों की दैनिक गतिविधियों को सुगम बनाने के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक सहभागिता बढ़ाना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। सहायक उपकरणों की उपलब्धता से बच्चों को विद्यालय आने-जाने, अध्ययन-अध्यापन एवं अन्य गतिविधियों में सुविधा मिलेगी। साथ ही उन्हें समान अवसर प्रदान करने और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
प्रमुख योगदान
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं विद्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों का सक्रिय सहयोग रहा। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी उपेन्द्र कुमार देवांगन, समग्र शिक्षा नोडल अधिकारी आत्माराम साहू, सेजेस विद्यालय खैरागढ़ के प्राचार्य कमलेश्वर सिंह, विकासखंड स्रोत समन्वयक खैरागढ़ सुजीत कुमार चौहान, विकासखंड स्रोत समन्वयक छुईखदान दुष्यंत कुमार शर्मा, खैरागढ़ बीआरपी आरती यादव एवं छुईखदान बीआरपी प्रवीण कुमार रामटेके सहित शिक्षिका अनुपमा यादव, प्रधान पाठक सरिता पाण्डे, जयप्रकाश नायक एवं निकिता साहू का विशेष योगदान रहा।
जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा दिव्यांग बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने, उनकी प्रतिभा एवं क्षमताओं को प्रोत्साहित करने तथा शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस प्रकार के शिविर दिव्यांग बच्चों की आवश्यकताओं की पहचान करने और उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।



